नई दिल्ली / न्यू रिपब्लिक ब्यूरो: भारत सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण करने के बजाय उनमें हिस्सेदारी क्यों बेचता रहता है?। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), महारत्न कंपनियों और केंद्रीय मंत्रालयों से जुड़े इस महत्वपूर्ण नीतिगत घटनाक्रम पर उद्योग जगत की नज़रें टिकी हुई हैं।
भारत सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण करने के बजाय उनमें हिस्सेदारी क्यों बेचता रहता है।बिजनेस स्टैंडर्ड
प्रमुख बिंदु एवं मुख्य विवरण:
- सार्वजनिक क्षेत्र के रणनीतिक विकास, सुशासन और प्रशासनिक नीतियों के तहत यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
- उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय से परिचालन दक्षता, वित्तीय मजबूती और बाजार प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- केंद्रीय सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड (PESB) और संबंधित प्रशासनिक मंत्रालयों के दिशानिर्देशों के अनुरूप आगे की रूपरेखा तैयार की गई है।
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSUs) भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक बुनियादी ढांचे के मजबूत आधार स्तंभ हैं। न्यू रिपब्लिक हिंदुस्तान इस नीतिगत और कॉरपोरेट विकास पर लगातार सटीक और प्रामाणिक रिपोर्टिंग जारी रखेगा।
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